– विनोद कुमार‚ वरिष्ठ पत्रकार
नई दिल्ली/पटना‚ 17 फरवरी, 2026 आज पूरा देश भारत के महान समाजवादी नेता, 'भारत रत्न' और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जननायक कर्पूरी ठाकुर की पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। 17 फरवरी 1988 को दुनिया को अलविदा कहने वाले इस महापुरुष की याद में आज देश के हर कोने में 'सामाजिक न्याय' के संकल्प को दोहराया जा रहा है।
देश के प्रमुख राजनेताओं ने जननायक के सिद्धांतों और उनकी ईमानदारी को याद करते हुए अपने विचार साझा किए:
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन: "एक सच्चे जननायक के रूप में उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन वंचितों के सशक्तिकरण को समर्पित किया। उनकी सादगी और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता आज भी राष्ट्र को प्रेरित करती है।"
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह: उन्होंने 'एक्स' पर लिखा, "सामाजिक जीवन में शुचिता व पारदर्शिता के प्रतीक कर्पूरी ठाकुर जी का जीवन युवाओं के लिए सदैव प्रेरणीय रहेगा। वे स्वाधीनता और समानता के सच्चे पुरोधा थे।"
भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा: "पिछड़ों और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया। उनके द्वारा स्थापित त्याग के मानदंड आज भी राजनीति के लिए मार्गदर्शक हैं।"
विपक्ष के नेता राहुल गांधी: "कर्पूरी ठाकुर जी का जीवन सामाजिक न्याय की लड़ाई का जीवंत दस्तावेज है। उनकी नीतियां आज भी हाशिए पर खड़े लोगों को मुख्यधारा में लाने का मार्ग प्रशस्त करती हैं।"
भारत रत्न जननायक स्व० कर्पूरी ठाकुर की पुण्यतिथि के अवसर पर मंगलवार को बिहार की राजधानी पटना में देशरत्न मार्ग स्थित जननायक कर्पूरी ठाकुर स्मृति संग्रहालय में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी, कृषि मंत्री रामकृपाल यादव, विधायक श्याम रजक, विधान पार्षद श्रीमती कुमुद वर्मा, पूर्व विधायक अनिल कुमार, जदयू के राष्ट्रीय महासचिव मनीष कुमार वर्मा, बिहार राज्य नागरिक परिषद् के महासिचव अरविंद कुमार उर्फ़ छोटू सिंह, बिहार बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य शिवशंकर निषाद, जननायक स्व० कर्पूरी ठाकुर के परिजन सहित अन्य जनप्रतिनिधियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी भारत रत्न जननायक स्व० कर्पूरी ठाकुर की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर अपनी श्रद्धांजलि दी।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ: "शोषित-वंचितों के सशक्तिकरण और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता सदैव प्रेरणास्पद रहेगी।"
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता: "सादगी और शुचिता की राजनीति के वे जीवंत प्रतीक थे। उनके विचार हमें समतामूलक समाज के निर्माण की प्रेरणा देते हैं।"
कर्पूरी ठाकुर केवल नारे लगाने वाले नेता नहीं थे, बल्कि उन्होंने व्यवस्था में ठोस बदलाव किए। 1978 में जब वे बिहार के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने 'कर्पूरी ठाकुर फॉर्मूला' लागू किया।
उन्होंने पिछड़ों के भीतर भी 'अति पिछड़ों' (EBC) की पहचान की और उनके लिए अलग आरक्षण सुनिश्चित किया।
इस मॉडल में पिछड़ों को 12%, अति पिछड़ों को 8%, महिलाओं को 3% और उच्च जाति के गरीबों को 3% आरक्षण दिया गया था। यही मॉडल आगे चलकर 'मंडल आयोग' की सिफारिशों का आधार बना।
शिक्षा के क्षेत्र में उनका सबसे साहसिक निर्णय अंग्रेजी की अनिवार्यता को समाप्त करना था। उनका मानना था कि गरीब और ग्रामीण छात्र केवल अंग्रेजी की वजह से अपनी प्रतिभा नहीं दिखा पाते। उन्होंने मैट्रिक परीक्षा में अंग्रेजी की अनिवार्यता खत्म कर लाखों गरीब बच्चों के लिए उच्च शिक्षा और सरकारी नौकरियों के द्वार खोल दिए।
मुख्यमंत्री रहते हुए भी उन्होंने अपने बेटे को राजनीति से दूर रखा और कभी अपने परिवार के लिए निजी संपत्ति नहीं बनाई।
उनकी पुण्यतिथि पर आज उत्तर प्रदेश के मथुरा में एक बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। ऑल इंडिया महापद्मनन्द कम्युनिटी एजुकेटेड एसोसिएशन ने जिलाधिकारी के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा है। उनकी मांग है कि बिहार की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी 'कर्पूरी ठाकुर आरक्षण मॉडल' लागू किया जाए, ताकि अति पिछड़े वर्गों को उनका वास्तविक हक मिल सके।

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