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किस दिशा में जाएगा रांची में जेपीएससी-जेएसएससी घोटाले के खिलाफ छात्रों का शांतिपूर्ण आंदोलन

– विनोद कुमार‚ वरिष्ठ पत्रकार

रांची। झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में कथित बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के खिलाफ छात्र पिछले कई दिनों से बापू वाटिका और जयपाल सिंह स्टेडियम परिसर में धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।

आंदोलन स्थल पर फिलहाल दो अलग-अलग मंच सक्रिय दिख रहे हैं। एक शुद्ध छात्र संगठनों का मंच है, जबकि दूसरा नई राजनीतिक पार्टी झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी परिषद का। पार्टी के एक विधायक आमरण अनशन पर बैठे थे। सोनम वांगचुक से बातचीत के बाद अनशन समाप्त कराया गया और उन्हें पानी पीने की सलाह दी गई। सरकार की ओर से अभी तक कोई औपचारिक प्रतिनिधि या समिति आंदोलन स्थल पर नहीं पहुंची है।


पहली बार इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पिता स्वर्गीय शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि पर प्रतिक्रिया दी। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार इस दिशा में काम कर रही है और छात्रों को घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, “हम सीना चीरकर नहीं दिखा सकते कि क्या कर रहे हैं, लेकिन काम चल रहा है।” मुख्यमंत्री की पत्नी कल्पना सोरेन ने भी यही बात दोहराई कि सरकार गंभीरता से इस मसले पर कार्य कर रही है।



रांंची के पत्रकार तीर्थ नाथ आकाश ने प्रदर्शन स्थल से बताया कि कांग्रेस चूंकि सत्तारूढ गठबंध में है और इस कारण उसकी छात्र इकाइयां सक्रिय हैं। एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता समय-समय पर पहुंच रहे हैं। रांची जिला कांग्रेस कमेटी भी निरंतर संपर्क में है। पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने छात्रों के लिए खाने-पीने का सामान भिजवाया है। विपक्षी भाजपा की ओर से कोई विधायक या नेता स्थल पर नहीं आया है, हालांकि सोशल मीडिया और ट्विटर पर नैतिक समर्थन की बातें चल रही हैं। आम आदमी पार्टी के नेता अभिजीत दीक्षित से छात्रों की बात हुई। उन्होंने तबीयत खराब होने का हवाला देते हुए कहा कि ठीक होते ही पहुंचेंगे। हालांकि छात्रों के एक वर्ग में दिल्ली के जंतर मंतर वाले अनुभव के कारण बाहरी संगठनों को बुलाने को लेकर सतर्कता बनी हुई है।

आंदोलन का माहौल शांतिपूर्ण है। पुलिस ने बहुत संयम और सहयोग का रुख अपनाया है। कोतवाली थाने के प्रभारी समेत पुलिसकर्मी छात्रों की मदद कर रहे हैं। एक बार भारी बारिश में टेंट गिरने पर थाना प्रभारी खुद खड़े होकर टेंट लगाने में सहयोग करते दिखे। रोज मसाल जुलूस, तिरंगा यात्रा और अल्बर्टिका चौक तक मार्च निकाले जा रहे हैं, लेकिन पुलिस ने किसी तरह की कठोर कार्रवाई नहीं की है। यह रवैया दिल्ली के जंतर मंतर आंदोलन से बिल्कुल अलग है, जहां पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की खबरें आई थीं। यहां रांची सिविल कोर्ट, डीसी कार्यालय और शहर के दिल अल्बर्टिका चौक के पास होने के बावजूद कोई भारी बैरिकेडिंग या बल प्रयोग नहीं दिखा।

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पोस्ट्स में सांप्रदायिक एंगल तलाशने की कोशिश भी हुई। एक वीडियो में कहा गया कि यहां “जुनेद की बिरयानी” नहीं बल्कि मंदिर से लंगर आ रहा है। छात्रों का कहना है कि अंदरूनी माहौल भगवामय बनाने की कोशिशें हो रही हैं, लेकिन मुख्यधारा के प्रदर्शनकारियों में यह भावना नहीं है। कई छात्र संगठन—एआईएसएफ, एसएफआई, डीवाईएफआई, एनएसयूआई आदि—एकजुट हैं।

रांची से पत्रकार इम्तियाज अहमद ने बताया कि चार छात्र संगठनों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विधानसभा घेराव का ऐलान किया है। नेहा बोरा के आने के बाद एक तय तारीख को विधानसभा मार्च और घेराव का कार्यक्रम है। छात्रों की मुख्य मांगें हैं—अनियमितताओं वाली भर्तियों को रद्द किया जाए, पूरी जांच हो, सीबीआई जांच कराई जाए और शिक्षा विभाग का प्रभार मुख्यमंत्री के पास होने के कारण उनके इस्तीफे की मांग भी कुछ संगठनों द्वारा उठाई जा रही है।

जेपीएससी की विभिन्न परीक्षाओं में लंबे समय से गड़बड़ियों के आरोप लगते रहे हैं। पहली और दूसरी परीक्षा का मामला अभी भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। हालिया परीक्षाओं में आउटसोर्सिंग एजेंसियों के ब्लैकलिस्टेड होने के बावजूद काम दिए जाने, अंक आने के बावजूद चयन न होने जैसे मुद्दे सामने आए। सरकार ने एससीआईडी जांच के आदेश दिए, चेयरमैन ने इस्तीफा दिया और कुछ पद रद्द किए गए। जांच अभी जारी है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई होगी।

छात्रों का कहना है कि सालों की तैयारी के बाद अनियमितताओं से उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है। सरकार पर दबाव बढ़ रहा है। एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुख्यमंत्री से बात करने वाले हैं। एक उच्चस्तरीय समिति बनाने की खबरें भी आईं, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम स्थल पर नहीं दिखा। आंदोलन कितना लंबा चलेगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार छात्रों की मांगों पर कितनी गंभीरता से प्रतिक्रिया देती है। फिलहाल रांची का यह छात्र आंदोलन शांति और संयम के साथ जारी है।


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