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पीपुल फाउंडेशन के ‘सब रंग’ कार्यक्रम में देश के जाने-माने शायरों और कवियों ने की शिरकत

 ‘एक शाम मनोज शाश्वत के नाम’ के तहत मुशायरे एवं कवि सम्मेलन का आयोजन

नई दिल्ली, 9 सितंबर 2026। पीपुल फाउंडेशन की ओर से शायर एवं कवि मनोज शाश्वत के सम्मान में ‘एक शाम मनोज शाश्वत के नाम’ शीर्षक से मुशायरे एवं कवि सम्मेलन का आयोजन उर्दू घर, राउज़ एवेन्यू, नई दिल्ली में किया गया। पीपुल फाउंडेशन की साहित्य, संगीत और संवाद पर केंद्रित श्रृंखला ‘सब रंग’ के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में हिंदी और उर्दू साहित्य से जुड़े अनेक प्रतिष्ठित शायरों, कवियों और साहित्यप्रेमियों ने शिरकत की।


कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध शायर डॉ. माजिद देवबंदी ने की। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के महाप्रबंधक और प्रख्यात कवि एवं साहित्यकार आलोक अविरल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे, जबकि रामपुर-सहसवान घराने के मशहूर गायक उस्ताद गुलाम अब्बास खान, मुहम्मद सामाजिक कार्यकर्ता हिफ़ज़ुल्लाह अंसारी और हाजी आक़िल हुसैन सम्मानित अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल हुए।

कार्यक्रम का संचालन प्रसिद्ध शायर एवं संचालक मोईन शादाब ने किया। अपनी प्रभावशाली निज़ामत से उन्होंने पूरे कार्यक्रम को एक खूबसूरत साहित्यिक लय प्रदान की।

मुशायरे एवं कवि सम्मेलन में जिन कवियों और शायरों ने अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं, उनमें डॉ. माजिद देवबंदी, डॉ. अंजुम बाराबंकवी, विजय तिवारी, शकील जमाली, शाहिद अंजुम, मोईन शादाब, प्रो. रहमान मुसव्विर, ज़ुबैर अंसारी, अनवर कमाल, डॉ. उर्वशी उर्वी, अनस फ़ैज़ी, हामिद अली अख़्तर, अख़्तर आज़मी, सय्यद नज़्म इक़बाल, अमजद आतिश, सिकंदर मिर्ज़ा, अभिषेक तिवारी, मलिक रिज़वान, सृष्टि सिंह बघेल और मोहिता रिदा के नाम शामिल हैं।

कार्यक्रम में मनोज शाश्वत की साहित्यिक यात्रा, रचनाधर्मिता तथा हिंदी-उर्दू के साझा सांस्कृतिक संसार पर भी चर्चा हुई। संगीत की प्रस्तुति ने कार्यक्रम को और अधिक प्रभावशाली बना दिया।

कार्यक्रम के संयोजक शाहिद अंजुम ने स्वागत भाषण में कहा कि आज के समय में साहित्यिक आयोजनों की प्रासंगिकता और बढ़ गई है। ऐसे कार्यक्रम न केवल रचनाकारों और पाठकों के बीच संवाद का अवसर उपलब्ध कराते हैं, बल्कि हिंदी और उर्दू की साझा गंगा-जमुनी तहज़ीब को भी मजबूत करते हैं।

पीपुल फाउंडेशन की संस्थापक और कार्यक्रम की आयोजक रुबाब ख़ान ने कहा कि पीपुल फाउंडेशन ने ‘सब रंग’ के ज़रिए साहित्य, संगीत और संवाद को एक मंच पर लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में आयोजित ‘एक शाम मनोज शाश्वत के नाम’ ने ‘सब रंग’ की इस भावना को सार्थक किया।

*कार्यक्रम के अंत में कार्यक्रम निदेशक फ़र्ज़ ख़ान ने सभी अतिथियों, रचनाकारों और साहित्यप्रेमियों का आभार व्यक्त किया।*

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