राँची::गोड्डा जिले में स्थापित 1,600 मेगावाट की अडानी पावर लिमिटेड परियोजना को लेकर विगत वर्षों में स्थानीय किसानों और ग्रामीणों द्वारा गंभीर आपत्तियाँ और विरोध प्रदर्शन दर्ज किए गए हैं। मुख्य मुद्दे भूमि अधिग्रहण में पारदर्शिता की कमी, पर्यावरणीय मानदंडों का उल्लंघन, पुनर्वास और मुआवज़े में अनियमितताएँ, तथा स्थानीय रोजगार की अनुपलब्धता रहे हैं।
सरकार की कार्रवाई
राज्य सरकार ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए 28 अगस्त 2025 को एक उच्च स्तरीय समिति के गठन की घोषणा की है। इस समिति की अध्यक्षता झारखंड के मुख्य सचिव करेंगे और इसमें कुल 10 सदस्य शामिल होंगे।
जांच का दायरा
समिति निम्नलिखित बिंदुओं पर गहन जांच करेगी:
भूमि अधिग्रहण की वैधता और प्रक्रियात्मक पारदर्शिता
प्रभावित परिवारों को दिया गया मुआवज़ा और पुनर्वास पैकेज
पर्यावरणीय मंजूरी और उसके उल्लंघन की स्थिति
स्थानीय लोगों को रोजगार देने की स्थिति
परियोजना का सामाजिक-आर्थिक प्रभाव
पोड़ैयाहाट से विधायक प्रदीप यादव ने इस निर्णय का स्वागत किया और कहा, विधायक प्रदीप यादव ने विधान सभा सत्र मे अडानी पॉवर प्लांट के खिलाफ पुर जोर तरीके से उठाया था जिसके वजह से इस समिति का गठन किया झारखंड के मुख्य सचिव अध्यक्षता करेंगे कुल 10 सदस्य शामिल है
“यह निर्णय गोड्डा के लोगों के लिए न्याय और उम्मीद का संकेत है। सरकार ने साबित कर दिया है कि वह जनता की आवाज़ सुनती है। अब प्रभावितों को न्याय, मुआवज़ा और पुनर्वास मिलने की उम्मीद बढ़ी है।”
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